तेल के लिए उमड़ा जनसैलाब, पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड… बीड-धाराशिव में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत
Himachali Khabar: महाराष्ट्र के बीड और धाराशिव (उस्मानाबाद) जिलों में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत की खबरें आ रही हैं, जिससे आम जनजीवन और कृषि कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं. कई पेट्रोल पंप ‘नो स्टॉक’ (No Stock) के बोर्ड के साथ बंद हो गए हैं, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं. इस कमी के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

जानकारी के मुताबिक जालना जिले के शाहगढ़ क्षेत्र से लेकर आसपास के कई पेट्रोल पंपों पर भी ईंधन उपलब्ध नहीं है. कई पेट्रोल पंपों पर नो स्टॉक के बोर्ड लगे हुए हैं. पेट्रोल और डीजल की कमी के कारण वाहन चालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. वहीं जहां कहीं ईंधन उपलब्ध है, वहां पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं.
पेट्रोल और डीजल न मिलने से भड़के लोग
धाराशिव जिले के कळंब-ढोकी क्षेत्र में भी पेट्रोल-डीजल की गंभीर कमी सामने आई है. कई पेट्रोल पंप ईंधन खत्म होने के कारण बंद पड़े हैं, जिससे खेती और मशागत के काम ठप हो गए हैं. लोगों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है. ईंधन की कमी का असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है. पेट्रोल और डीजल नहीं मिलने से नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है.
खेती के काम और माल ढुलाई पर बुरा असर
बीड जिले में पिछले तीन दिनों से डीजल की कमी है. कई स्थानों पर डीजल न मिलने के कारण मालवाहक वाहनों के चालकों के साथ-साथ यात्री वाहनों के चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसके साथ ही, बीड जिले से अन्य स्थानों तक कृषि उपज ले जाने में किसानों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. डीजल की भारी कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के काम और माल ढुलाई पर बुरा असर पड़ा है. ye khabar aap himachali khabar me padh rhe hai
प्रशासन से आपूर्ति बहाल करने की मांग
कई स्थानों पर डीजल उपलब्ध नहीं है, लेकिन जहां डीजल उपलब्ध है, वहां भी थोड़ी मात्रा में दिया जा रहा है. ऐसे में लंबी दूरी की यात्रा कैसे की जाए, यह सवाल खड़ा हो गया है. अब चालक प्रशासन से इस संबंध में कदम उठाने की मांग कर रहे हैं. शनिवार (3 मई) सुबह के समय कई पेट्रोल पंप बंद मिले, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई. स्थिति को लेकर स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों पर अब आपूर्ति बहाल करने का दबाव बढ़ता जा रहा है.