जब चंद्रशेखर ने इंदिरा से कहा… कांग्रेस बरगद हो गई है, जब तक ये टूटेगी नहीं, देश में कोई नई राजनीति नहीं आएगी

Himachali Khabar: वे स्वभाव से धारा के खिलाफ चलते थे. मुद्दों पर उनकी आवाज हमेशा अकेली रही. पर वक्त ने उस अकेली आवाज को हरदम सही साबित किया. रिश्ते निभाने और अपनों का ख्याल रखने में उनका कोई सानी नहीं था. उन्हें मानने वाले राजनीतिकों ने उनसे कुछ सीखा या नहीं. पर उनके बाद समर्थकों ने दाढ़ी को अपनी शख्सियत का जरूरी हिस्सा बना लिया. हालांकि चंद्रशेखर जी की दाढ़ी रखने की शुरुआत की वजह और थी. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए चंद्रशेखर अपने एक मित्र के साथ जयपुर गए थे. खुद दाढ़ी बनाने की आदत नहीं थी. हिन्दू हॉस्टल में डेढ़ रुपये में महीने भर नाई रोज दाढ़ी बना देता था.

जब चंद्रशेखर ने इंदिरा से कहा… कांग्रेस बरगद हो गई है, जब तक ये टूटेगी नहीं, देश में कोई नई राजनीति नहीं आएगी
जब चंद्रशेखर ने इंदिरा से कहा… कांग्रेस बरगद हो गई है, जब तक ये टूटेगी नहीं, देश में कोई नई राजनीति नहीं आएगी

जयपुर में होटल के आसपास कोई सैलून नहीं था. सड़क के किनारे कई नाई ईंटों पर बैठाकर हजामत बनाने वाले उन्हें मिले. उनसे दाढ़ी बनवाने का मन नहीं बना. फिर दूसरे रोज भी दाढ़ी नहीं बनी. दो दिन बाद सोचा कि इसी अवस्था में समाजवाद आए तो क्या हर्ज है. फिर अगर आप दाढ़ी से परेशान हो गए तो समाजवाद के संघर्ष का क्या होगा? इसलिए युवा चंद्रशेखर जी ने दाढ़ी बनाना छोड़ दिया. फिर ताउम्र यह दाढ़ी चंद्रशेखर की शख्सियत का हिस्सा बन गई.

चंद्रशेखर हमेशा बेलाग और दो टूक रहे

अपने पूरे राजनीतिक जीवन में चंद्रशेखर हमेशा बेलाग और दो टूक रहे. चाहे 1969 में कांग्रेस की टूट हो, इमरजेंसी के सवाल पर अपनी ही सरकार का विरोध हो या ऑपरेशन ब्लू स्टार का विरोध हो, वीपी सिंह सरकार का बाबरी मस्जिद पर रवैया हो, अपनी बात कहते समय उन्होंने राजनीतिक नफे-नुकसान की कभी फिक्र नहीं की. पीएसपी से इस्तीफे के बाद चंद्रशेखर कांग्रेस में शामिल हुए. इंदिरा जी नई-नई प्रधानमंत्री बनी थीं.

जब इंदिरा से मिलने गए चंद्रशेखर…

चंद्रशेखर उनसे मिलने गए. इंदिरा जी ने उनसे पूछा. समाजवादी जमात छोड़ कांग्रेस में कैसा लग रहा है? युवा चंद्रशेखर ने कहा, मैं यहां उसी के विस्तार के लिए आया हूं. इंदिरा जी ने पूछा, क्या आप कांग्रेस को समाजवादी मानते हैं?”

चंद्रशेखर जी ने कहा, नहीं मानता. पर लोग ऐसा कहते हैं. इंदिरा जी ने जवाबी सवाल किया कि फिर आप कांग्रेस में क्यों आये? चंद्रशेखर बोले, आप सही जबाब सुनना चाहती हैं? इंदिरा जी ने कहा-नि: संकोच बोलिए. चंद्रशेखर ने कहा ” मैंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में 13 साल तक पूरी क्षमता और निष्ठा से काम किया. दल को पूरी ईमानदारी से समाजवाद के रास्ते पर ले जाने की कोशिश की. लेकिन काफी समय तक काम करने के बाद मुझे लगा कि वह संगठन ठिठक कर रह गया है. पार्टी कुंठित हो गई है. अब वह आगे नहीं बढ़ेगी. फिर मैंने सोचा कांग्रेस एक बड़ी पार्टी है. इसी में चलकर देखें. कुछ करें.” ye khabar aap himachali khabar me padh rhe hai

इंदिरा जी का अगला सवाल था, यहां आकर आप क्या करना चाहते हैं? मैं कांग्रेस को सोशलिस्ट बनाने की कोशिश करूंगा. इंदिरा जी ने कहा और अगर न बनी तो? चंद्रशेखर तपाक से बोले तो इसे तोड़ने का प्रयास करूंगा. क्योंकि यह जब तक टूटेगी नहीं तब तक देश में कोई नई राजनीति नहीं आएगी. मैं प्रयास यही करूंगा कि यह समाजवादी बने. पर यदि नहीं बनी तो इसे तोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा.”

इमरजेंसी का युवातुर्को ने विरोध किया

इंदिरा जी को ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी. उन्होंने कहा कि मैं आपसे सवाल पूछ रही हूं और आप मुझे इस तरह का जवाब दे रहे हैं? चंद्रशेखर बदस्तूर बोले सवाल आप पूछ रही हैं तो जवाब तो आपको ही दूंगा. इंदिरा जी का अगला सवाल था,पार्टी तोड़ने से आपका क्या मतलब है? इससे क्या होगा? चंद्रशेखर नहीं रुके. कहा, देखिए कांग्रेस बरगद का पेड़ हो गई है. इस बरगद के नीचे कोई पौधा पनप नहीं सकता. इसलिए जब तक यह पार्टी नहीं टूटेगी, कोई क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं होगा. इंदिरा गांधी का चंद्रशेखर से यह नया परिचय था. चंद्रशेखर की आत्मकथा “जीवन जैसा जिया” में यह प्रसंग दर्ज है.

फिर 1969 में जब कांग्रेस टूटती है तो कांग्रेस के बुजुर्ग इंदिरा गांधी को पार्टी से बाहर कर देते है. इंदिरा जी के साथ पांच लोग और निकलते हैं वे थे- चंद्रशेखर, कृष्ण कांत, मोहन धारिया, रामधन और अर्जुन अरोड़ा. इन्हें युवा तुर्क कहा गया. उस वक्त इन युवातुर्को ने इंदिरा जी के लिए सिंडिकेट से लोहा लिया. बाद में जब इंदिरा जी ने इमरजेंसी लगायी. तो इन युवातुर्को ने उनका भी विरोध किया. जेल गए. एक वक्त ऐसा भी आया कि चंद्रशेखर संसद में अपनी पार्टी के इकलौते सांसद रह गए. पर कभी मूल्यों से समझौता नहीं किया. साफगोई उनके व्यक्तित्व का हिस्सा थी. और मुद्दों पर अड़ना उनका स्वभाव. आज यह सब कहां है. इन्हीं चंद्रशेखर का आज जन्मदिन है. उनकी जन्मशती की शुरुआत. उनकी स्मृतियों को प्रणाम.

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