क्या ईरान में फिर मचने जा रही तबाही? ट्रंप के 336 घंटे वाले वॉर फॉर्मूले से टेंशन में दुनिया

Himachali Khabar: मिडिल ईस्ट में होने वाली जंग पर अब ट्रंप ने काम करना शुरू कर दिया है. ईरान के खिलाफ जंग के पहले चरण में अमेरिका को लक्ष्य हासिल नहीं हुए, जिसकी उसने उम्मीद की थी. ऐसे में दुनिया भर में अमेरिका की साख पर सवाल उठने लगे हैं. वहीं शांति वार्ता का जो राग ट्रंप अलाप रहे थे. उससे ईरान के कानों पर जू तक नहीं रेंग रही. नतीजा अब ट्रंप ने 336 घंटों का युद्ध फॉर्मूला बनाया है. एक ऐसी युद्धनीति, जिसमें ईरान के विनाश की स्क्रिप्ट लिखी गई है. अगले 48 घंटे ना सिर्फ ईरान बल्कि पूरे अरब पर भारी हैं. आखिर क्या है ट्रंप का ईरान विजयी ब्लूप्रिंट आइए जानें

क्या ईरान में फिर मचने जा रही तबाही? ट्रंप के 336 घंटे वाले वॉर फॉर्मूले से टेंशन में दुनिया
क्या ईरान में फिर मचने जा रही तबाही? ट्रंप के 336 घंटे वाले वॉर फॉर्मूले से टेंशन में दुनिया

अब निर्णय का समय आ गया है. सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति को उस बारे में जानकारी दी है, जो अंतिम प्रहार हो सकता है. ने साफ कहा है कि ईरान अगर परमाणु हथियार रखने की ज़िद नहीं छोड़ता है तो वो बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ने वाले हैं. वहीं, IRGC प्रवक्ता, इब्राहिम जुल्फेकारी ने कहा कि हमारे बुनियादी ढांचे पर किसी भी तरह के हमले का करारा जवाब दिया जाएगा.

इस तरह से मध्य पूर्व में जंग की चिंगारी भड़कने लगी है और फारस की खाड़ी में काउंटडाउन शुरू हो गया है. वार्ता और समझौतों की आस अब टूट चुकी है. अब अंतिम और निर्णायक फैसले की घड़ी है, क्योंकि अगले 48 घंटों में महाविनाश का वो चरण प्रारंभ होने वाला है, जिसकी आहट से ही पूरे अरब में खौफ पसर गया है और जिसकी गवाही दे रही है वाशिंगटन पोस्ट की सबसे लेटेस्ट रिपोर्ट.

ट्रंप का ईरान पर ‘336 घंटे’ का निर्णायक युद्ध प्लान

जिसमें दावा किया गया है कि ईरान के साथ युद्ध का राउंड 2 शुरू होने वाला है. अमेरिका अब ईरान पर बड़े हमले की तैयारी कर रहा है. 336 घंटों में ईरान को तबाह कर जीत का लक्ष्य तय किया गया है और इसबार अमेरिका होर्मुज के साथ साथ ग्राउंड ऑपरेशन भी करेगा, क्योंकि 14 दिनों के ग्राउंड ऑपरेशन की पूरी प्लानिंग हो चुकी है.

ईरान के साथ शांति वार्ता को लेकर जब कोई रास्ता नहीं निकला तो ट्रंप ने ईरान पर आखिरी प्रहार की तैयारी कर ली. अमेरिकी सेना वॉर रेडी हो चुकी है. मिसाइलों का मुंह तेहरान की तरफ मोड़ दिया गया है. ye khabar aap himachali khabar me padh rhe hai

ईरान जंग के पहले चरण में अमेरिका को वो कामयाबी नहीं मिली जिसकी कल्पना ट्रंप ने की थी. साथ ही नाकाबंदी का असर तो हुआ लेकिन ईरान पर उतना कारगर साबित नहीं हुआ. ऐसे में अब ईरान पर जीत हासिल करने के लिए एकबार फिर ट्रंप ने युद्ध का रास्ता अख्तियार करने का मन बना लिया है. अमेरिकी सेना को ट्रंप के ऑर्डर का इंतजार है. बस एक ऑर्डर और फिर ईरान पर बारूदी वर्षा का नया अध्याय प्रारंभ हो जाएगा.

मध्य पूर्व में जंग की चिंगारी

खबरों की मानें तो शांति वार्ता पर ईरान की आनाकानी के बाद अब एकबार फिर ट्रंप सिचुएशन रूम में पहुंचे, जहां उनके साथ युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ, सेंटकॉम के कमांडर ब्रैड कूपर, एयरफोर्स जनरल डैन केन, खुफिया एंजेसियों के प्रमुख और नेशनल सिक्यूरिटी टीम के अधिकारी मौजूद थे. सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति को उस बारे में जानकारी दी है, जो अंतिम प्रहार हो सकता है. अमेरिकी सेना हमलों की एक छोटी और शक्तिशाली लहर की तैयारी कर रही है. इस तैयारी में ईरान की बची हुई सैन्य संपत्ति उनकी लीडरशिप और बुनियादी ढांचा शामिल हैं.

सिचुएशन रूम में 45 मिनट तक बैठक चली, जिसमें सेंटकॉम कमांडर ब्रैड कूपर ने ट्रंप को ब्रीफिंग दी. ट्रंप को पूरा एक्शन प्लान बताया गया. अलग अलग सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई. ब्रीफिंग से साफ हो गया है कि वॉशिंगटन अब कूटनीति के बजाय मिलिट्री एक्शन अपनाएगा, जो ईरान के लिए शुभ संकेत नहीं है.

अमेरिकी अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ का दावा है कि ट्रंप निर्णायक जीत के लिए सैन्य कार्रवाई करेंगे और इस बार 336 घंटे में फुल एंड फाइनल फैसला होगा..यानी 14 दिनों में ईरान को तबाह कर दिया जाएगा..

क्या ट्रंप का ये फैसला दुनिया में तीसरे विश्वयुद्ध का आगाज करेगा?

रिपोर्ट की मानें तो ब्रीफिंग के दौरान सेंटकॉम कमांडर ब्रैड कूपर ने ट्रंप के सामने तीन विकल्पों पर चर्चा की…जिससे ईरान को घुटनों पर लाया जा सके.

  • पहला विकल्प- होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जे के लिए ग्राउंड ऑपरेशन
  • दूसरा विकल्प- इस्फहान जाकर 60% संवर्धित यूरेनियम पर कब्जा
  • और तीसरा विकल्प- ईरानी सैन्य ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला

सेंटकॉम कमांडर के इस विकल्प को लेकर ट्रंप की गंभीर नजर आ रहे हैं, क्योंकि अब ईरान की जंग जीतना ट्रंप के लिए अहम का सवाल बन गया है, क्योंकि इस जंग में जिस तरीके से ट्रंप के छवि धूमिल हुई है. उस दाग को वो किसी भी कीमत पर धोना चाहते हैं.

दावा किया जा रहा है कि अगले 48 घंटे में ईरान पर एकबार फिर अमेरिका और इजराFल के हमले शुरू हो सकते हैं, क्योंकि सेंटकॉम के कमांडर ब्रेड कूपर ने ट्रंप को 45 मिनट तक ब्रीफिंग दी है. इन 45 मिनट में मल्टी स्ट्राइक, ऑपरेशनल रिस्क, हथियारों की जरूरत, डिप्लोमेटिक रिस्क और टाइमलाइन ऑप्शंस पर चर्चा की गई है.

क्या ईरान में एकबार फिर जंग का आगाज होने वाला है?

एक तरफ अमेरिकी सेना की तैयारी तो दूसरी तरफ ईरान के खिलाफ ट्रंप के सख्त तेवर साफ इशारा कर रहे हैं कि खाड़ी में अमेरिका कुछ बड़ा करने जा रहा है. ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान अगर परमाणु हथियार रखने की ज़िद नहीं छोड़ता है तो वो बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ने वाले हैं. ईरान के लिए ये मुसीबत मौजूदा समय से भी ज्यादा बड़ी होगी. उनकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा रही है. महंगाई करीब 100% पर है. डॉलर के मुकाबले उनकी मुद्रा का कोई वजूद नहीं रह गया है वो तेल का व्यापार बिल्कुल नहीं कर सकते , क्योंकि हमने ऐसी नाकेबंदी की हुई है जो 100% प्रभावी है.

ट्रंप जानते हैं कि ईरान के खिलाफ दोबारा जंग शुरू करना आसान नहीं, क्योंकि ऐसा करने से उनके खिलाफ अमेरिका में आवाज उठ सकती है. यही वजह है कि ट्रंप कांग्रेस से ईरान पर हमलों की परमिशन लेने की कोशिश कर रहे हैं.

यानी अगले 48 घंटों में खाड़ी में एक बार फिर जंग की चिंगारी भड़कने के संकेत मिल रहे हैं और अगर ऐसा हुआ तो फिर विनाश की वो तस्वीर दिखेगी, जिसका परिणाम सिर्फ और सिर्फ अरब की तबाही है.

खाड़ी में महाविनाश का खतरा

अब सवाल उठता है कि आखिर ट्रंप कैसे ईरान पर जीत हासिल करेंगे, वो भी मात्र दो हफ्तों में तो उसके लिए जिस रणनीति पर अमेरिका काम कर रहा है उसके मुताबिक अमेरिका और इजरायली सेना मिलकर ईरान पर तेज और बड़े पैमाने पर हमला करेंगे. ईरान के कम्यूनिकेशन सिस्टम और रडार को टारगेट किया जाएगा.

साथ ही ईरान के डिफेंस सिस्टम को हैक कर उसे जाम करने का प्लान है,ताकि ईरान अमेरिकी हमलों के सामने बेबस और लाचार हो जाए, जिसके बाद अमेरिका ईरान के अहम ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर देगा यानी इस बार ट्रंप ईरान पर अपनी पूरी ताकत से हमले के मिशन पर काम कर रहे हैं, ताकि इस जंग में अमेरिका की जीत सुनिश्चित की जा सके.

अमेरिका अब ईरान दहन के मिशन पर काम कर रहा है. लाल सागर से लेकर ओमान की खाड़ी तक सैन्य तैनाती तेज हो गई है. अगले 48 घंटे ईरान पर भारी हैं, क्योंकि अब ये जंग अमेरिका अपने खोए गौरव को हासिल करने के लिए लड़ने जा रहा है, जिसे ईरान ने युद्ध के पहले चरण में धूमिल कर दिया था और इसके संकेत भी मिलने लगे हैं खबरों की मानें तो सेना, नौसेना, मरीन, एयरफोर्स की तैनाती खाड़ी में की जा रही है. मध्य-पूर्व में लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ा दी गई है. मिडिल ईस्ट के एयरबेस पर अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमान ऑपरेशन के लिए तैयार हैं. तीनों सेनाओं को वॉर एक्शन मोड में रखा गया है.

अमेरिका के सैन्य विकल्प और ईरान पर संभावित हमले

अमेरिका की योजना छोटे लेकिन बेहद ताकतवर हमलों की है. यानी कम समय में ज्यादा असर, ताकि ईरान को तुरंत झटका दिया जा सके. एक ऐसा हमला जो सीधे ईरान के सैन्य ठिकानों, उसके कमांड ढांचे और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर देगा.

28 फरवरी को ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका की सैन्य तैयारियों की पोल खुल गई थी. साथ ही इजरायल की सैन्य शक्ति की भी कड़ी परीक्षा हुई थी. ऐसे में इस बार ट्रंप कोई गलती नहीं करना चाहते यही वजह है कि अमेरिका ने इजराइल में हथियार भेजना शुरू कर दिया है. भारी मात्रा में गोला बारूदी इजरायल पहुंच चुका है. पिछले 24 घंटे में 6500 टन हथियार इजराइल भेजे गए हैं, जिसमें मिलिट्री ट्रक और आर्मर्ड व्हीकल भी शामिल है.

खबर है कि अमेरिका ने इजराइल हथियार भेजे हैं. वहीं भारी संख्या में गोला बारूद भेजा गया है.. वहीं नेतन्याहू ने ट्रंप को एक्शन प्लान बताया है. अलग-अलग सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई है. इसके मायने क्या हैं?

आर्थिक नाकेबंदी और तृतीय विश्व युद्ध का डर

अमेरिका की सैन्य तैनाती के बाद अब इजराइल भी हाई अलर्ट पर है, लेकिन इस नए जंग में सबसे ज्यादा खतरा अरब देशों पर है. पिछली बार जब तनाव बढ़ा था. तब सबसे ज्यादा ड्रोन हमले अरब देशों और खासकर UAE में हुए थे. इसी दवाब में आकर युद्धविराम करना पड़ा था, लेकिन इस बार इजराइल इस दवाब के लिए भी तैयार है. ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने के लिए इस बार UAE में इजरायल ने लेजर आधारित नई सुरक्षा प्रणाली तैनात कर दी है.

वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर ट्रंप फिर युद्ध करने आए तो उन्हें कभी ना भूलने वाला दर्द देंगे.ऐसा भयानक जवाब की सुपरपावर का दंभ भरने वाले अमेरिका का अहंकार समंदर में डूब जाएगा. ईरानी सांसद महमूद नबवियां ने कहा कि अगर हम पर किसी तरह का हमला होता है और इस हमले में ईरानी नेताओं की हत्या की जाती है तो फिर फारस की खाड़ी के उन सभी निरंकुश शासकों को मार दिया जाएगा जो इसमें शामिल होंगे और उनके महलों को नष्ट कर दिया जाएगा.

अमेरिका-इजराइल इस बार किसी भी गलती को दोहराने के मूड में नहीं हैं, क्योंकि इसबार एक भी गलती अमेरिका के गुरूर को ना सिर्फ तोड़ देगी, बल्कि एक ऐसी जंग का आगाज हो जाएगा. जिसका कोई अंत नहीं है.

ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी 9 भारतवर्ष

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