सीजफायर के बीच लेबनान पर इजराइल का भीषण हमला, 24 घंटे में 50 एयर स्ट्राइक, 7 लोगों की मौत
Himachali Khabar: दक्षिणी लेबनान में शनिवार को हुए इजराइली हवाई हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. इजराइल ने यह हमला ऐसे समय में किया है, जब उसकी सेना ने नौ दक्षिणी गांवों के निवासियों को वहां से हटने की नयी चेतावनी जारी की थी. इजराइली सेना और लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला ने 17 अप्रैल से लागू संघर्ष विराम के बावजूद अपने हमले जारी रखे हैं.

लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज एजेंसी ने बताया कि कफर दजल गांव में एक कार पर हवाई हमला हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. वहीं, लुवाइजेह गांव में एक घर पर हुए हमले में तीन लोग मारे गए. एजेंसी के अनुसार, एक अन्य गांव पर हुए हमले में दो लोगों की जान चली गई. ye khabar aap himachali khabar me padh rhe hai
24 घंटों में लगभग 50 हवाई हमले
इजराइली सेना की प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल एला वावेया ने एक्स पर पोस्ट किया कि इजराइल की वायु सेना ने पिछले 24 घंटों में लगभग 50 हवाई हमले किए. उन्होंने बताया कि इन हमलों में हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे और सदस्यों को निशाना बनाया. 10 दिनों का संघर्षविराम 17 अप्रैल को लागू हुआ था. बाद में, इसे तीन हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया.
सीमावर्ती गांव यारून में, इजराइली सेना ने बुलडोजर से एक कैथोलिक कॉन्वेंट के कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया, जो हालिया लड़ाई के कारण खाली पड़ा था. बेसिलियन साल्वाटोरियन सिस्टर्स की प्रमुख ग्लैडिस सब्बाग ने कहा, हमने जो सुना है, वह यह है कि इसे बुलडोजर से नष्ट किया गया.
हिजबुल्लाह को खत्म कर रही IDF
सब्बाग ने बताया कि कॉन्वेंट में एक स्कूल भी था, जो 2006 के इजराइल-हिजबुल्लाह युद्ध के बाद से बंद था. वहां एक क्लिनिक भी था जिसे हाल ही में पास के गांव रमीच में स्थानांतरित कर दिया गया था. इजराइली सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि जब सेना यारून में हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर रही थी, तो एक ऐसा भवन क्षतिग्रस्त हो गया जिस पर कोई धार्मिक चिह्न नहीं था.
धार्मिक संस्थानों पर हमला
सेना ने कहा कि हिजबुल्लाह ने अतीत में कई मौकों पर इस परिसर का इस्तेमाल इजराइल की ओर रॉकेट दागने के लिए किया था. इजराइली सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जानबूझकर धार्मिक संस्थानों पर हमला नहीं करती. लेबनान के कैथोलिक चर्च ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि इस परिसर का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया गया था.