राज्यसभा को लेकर शशि थरूर ने जताई चिंता, बोले- परिसीमन से दोनों सदनों में फैलेगा असंतुलन
Himachali Khabar: महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन बिल को लेकर संसद का विशेष सत्र चल रहा है, इस दौरान पक्ष और विपक्ष की ओर से बिल को लेकर ढेरों तर्क भी दिए गए. पक्ष ने जहां बिल का समर्थन किया तो वहीं विपक्ष ने इसके पीछे की मंशा पर सवाल खड़े किए. कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए लाए गए बिलों को लेकर कहा कि परिसीमन की इस कवायद से दोनों सदनों (लोकसभा-राज्यसभा) के बीच असंतुलन पैदा हो जाएगा क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान राज्यसभा में सीटों की वृद्धि का कोई जिक्र नहीं है.

परिसीमन बिल के तहत लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 850 तक किए जाने की प्रक्रिया की आलोचना करते हुए थरूर ने कहा, “लोकसभा में सीटों को बढ़ाकर 850 करने से यह एक ऐसी संस्था बन जाएगी जो ठीक से काम भी नहीं कर पाएगी. अब लोकसभा का आकार तो बढ़ाया जा रहा है, लेकिन राज्यसभा के आकार बढ़ाने को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं आया है.”
दोनों सदनों के बीच बड़ा असंतुलनः थरूर
थरूर ने कहा कि इस वजह से दोनों सदनों के बीच बड़ा असंतुलन पैदा हो जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि हम महिला आरक्षण बिल का समर्थन करेंगे, लेकिन परिसीमन बिल के मामले में हमें थोड़ा इंतजार करना चाहिए. लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 होती है, जबकि एंग्लो-इंडियन समुदाय से आने वाले 2 सदस्यों को नियुक्त किया जा सकता है. इसी तरह वर्तमान में राज्यसभा में सांसदों की संख्या 250 होती है, जिसमें 12 सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति कर सकता है.
कांग्रेस सांसद थरूर ने आज शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पर कल से जारी बहस में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना देश की महिलाओं की आकांक्षाओं को “देश के इतिहास की सबसे विवादास्पद और जटिल प्रशासनिक कवायदों में से एक” में बंधक बनाकर रखने जैसा है.
हड़बड़ी में परिसीमन ठीक नहींः शशि थरूर
परिसीमन बिल लाने की आलोचना करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, “आपने इतनी हड़बड़ी में परिसीमन का प्रस्ताव रखा, जिस तरह की जल्दबाजी आपने नोटबंदी के दौरान दिखाई थी. हम सब जानते हैं कि दुर्भाग्य से देश को उस समय कितना नुकसान हुआ था. परिसीमन की कवायद राजनीतिक नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन) बन जाएगी. इसलिए इसे मत कीजिए.” ye khabar aap himachali khabar me padh rhe hai
इस अहम विषय पर गंभीर चर्चा की बात करते हुए थरूर ने कहा कि परिसीमन जैसे विषय पर गंभीर मंथन होनी चाहिए, इसमें छोटे राज्यों और बड़े राज्यों के बीच का संतुलन भी होना चाहिए, तमिलनाडु और केरल जैसे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों का ख्याल रखा जाना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ संसद में बैठक के दिन कम होते जा रहे हैं, वहीं जब सदन में 850 सांसद होंगे तो आसन को भी कार्यवाही संचालित करने में और सभी सदस्यों को पर्याप्त अवसर देने में काफी कठिनाई होगी. उन्होंने इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग सरकार से की.