क्या अमेरिका की नाकेबंदी हुई फेल? ईरान का सुपरटैंकर चकमा देकर निकला

Himachali Khabar: ईरान का एक बड़ा तेल टैंकर अमेरिका की कड़ी निगरानी से बचकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंच गया है. समुद्री ट्रैकिंग कंपनी टैंकर ट्रैकर्स के अनुसार, इस जहाज में करीब 220 मिलियन डॉलर का कच्चा तेल भरा हुआ है, जो लगभग 1.9 मिलियन बैरल के बराबर है. इस घटना से अमेरिका की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. यह सुपरटैंकर नेशनल ईरानियन टैंकर कंपनी (NITC) के स्वामित्म वाला है.

क्या अमेरिका की नाकेबंदी हुई फेल? ईरान का सुपरटैंकर चकमा देकर निकला
क्या अमेरिका की नाकेबंदी हुई फेल? ईरान का सुपरटैंकर चकमा देकर निकला

इस जहाज का नाम HUGE (IMO: 9357183) बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज अमेरिकी नौसेना की नजर से बचते हुए एशिया के पूर्वी हिस्से तक पहुंच गया. इस टैंकर को आखिरी बार एक हफ्ते से पहले श्रीलंका के पास देखा गया था. अब माना जा रहा है कि यह इंडोनेशिया के लोम्बोक स्ट्रेट से गुजरते हुए रियाउ द्वीपसमूह की ओर जा रहा है.

कैसे नाकेबंदी को चकमा दिया?

इस जहाज ने 20 मार्च के बाद से अपना ट्रैकिंग सिस्टम यानी ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर दिया था. AIS के जरिए जहाज की लोकेशन पता चलती है. जब कोई जहाज इसे बंद कर देता है, तो उसे डार्क एक्टिविटी कहा जाता है. आमतौर पर ऐसा वे जहाज करते हैं जो प्रतिबंधों से बचना चाहते हैं.

यह टैंकर स्ट्रेट ऑफ मलक्का से रवाना हुआ था, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है. इसके बाद से यह बिना सिग्नल के आगे बढ़ता रहा, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो गया.

ईरान को 45 हजार करोड़ का नुकसान

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए 13 अप्रैल से नाकेबंदी शुरू की थी. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की इस कार्रवाई से ईरान को अब तक करीब 4.8 अरब डॉलर (लगभग 45 हजार करोड़ रुपये) का तेल राजस्व घाटा हो चुका है.

लेकिन इस टैंकर के बच निकलने से साफ है कि इतनी सख्ती के बावजूद कुछ खामियां अभी भी हैं. इस मामले पर अभी तक अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन इस घटना ने यह दिखा दिया है कि इतने बड़े और व्यस्त समुद्री इलाकों में हर जहाज पर नजर रखना आसान नहीं है. ye khabar aap himachali khabar me padh rhe hai

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