पंचर के बाद कितने किमी तक चल सकता है ट्यूबलेस टायर, क्यों तुरंत नहीं निकलती हवा?
Himachali Khabar: देश में हर साल वाहनों की बिक्री बढ़ती जा रही है. बीता साल भी वाहन बिक्री के मामले में बेहतरीन रहा. अब बाजार में एडवांस और नई टेक्नोलॉजी से लैस गाड़ियां आ गई हैं. वाहनों के इंजन के साथ-साथ टायर भी अपडेट हो गए हैं. एक वक्त था जब रास्ते में टायर पंचर होने पर तुरंत स्टेपनी बदलनी पड़ती थी या मैकेनिक को खोजना पड़ता था, लेकिन ट्यूबलेस टायरों ने इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर दिया है. ट्यूबलेस टायरों की खूबी यह है कि ये पंचर होने के बाद भी कुछ दूरी तक चलते रहते हैं. इतना ही नहीं, इनका पंचर रिपेयर करना भी आसान होता है.

जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, इन टायरों को अंदरूनी ट्यूब की जरूरत नहीं होती. इनमें टायर की आंतरिक सतह पर एक विशेष एयरटाइट कोटिंग की जाती है, जो हवा को पूरी तरह रोककर रखती है. टायर का सटीक डिजाइन रिम के साथ मिलकर ऐसा सील बनाता है कि बिना ट्यूब के भी एयर प्रेशर एकदम सही बना रहता है. ye khabar aap himachali khabar me padh rhe hai
पंचर होने पर कितनी दूर तक चल सकते हैं ट्यूबलेस टायर?
वाहन चलाने वाले कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि अगर गाड़ी का ट्यूबलेस टायर पंचर हो जाए, तो वह कितनी दूर तक चल सकता है. ट्यूबलेस टायर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि पंचर होने के बाद भी यह तुरंत हवा नहीं छोड़ते. आप इन्हें पंचर की स्थिति में कितनी दूर तक चला सकते हैं, यह कुछ बातों पर निर्भर करता है.
कई एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर टायर में कील या कोई बारीक वस्तु चुभी है और वह अंदर ही फंसी हुई है, तो आप इसे 50 से 100 किलोमीटर तक कम रफ्तार में सुरक्षित रूप से चलाकर किसी रिपेयर शॉप तक पहुंच सकते हैं. ट्यूबलेस टायर में हवा बहुत धीमी गति से निकलती है, जिससे आपको गाड़ी सुरक्षित रोकने का पर्याप्त समय मिल जाता है. अगर टायर में हवा का दबाव (PSI) बहुत कम हो गया है, तो इसे ज्यादा दूर तक न चलाएं, क्योंकि इससे टायर के साइडवॉल और रिम खराब हो सकते हैं. अगर टायर में कील की जगह कोई बड़ा कट लगा है, तो हवा तेजी से निकल सकती है. ऐसे में गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है.
ट्यूबलेस टायर के फायदे
ट्यूबलेस टायर में हवा धीरे-धीरे निकलती है, जिससे अचानक नियंत्रण खोने का खतरा कम हो जाता है और आप वाहन को सुरक्षित स्थान तक ले जा सकते हैं. ट्यूब न होने के कारण ये टायर हल्के होते हैं, जिससे इंजन पर कम दबाव पड़ता है और ईंधन की बचत होती है. ट्यूब और टायर के बीच रगड़ न होने से टायर कम गर्म होते हैं, जिससे उनकी उम्र लंबी होती है. छोटे पंचर को टायर उतारे बिना ही बाहर से ठीक किया जा सकता है. ये टायर तेज रफ्तार पर बेहतर संतुलन और पकड़ प्रदान करते हैं.